रविवार, 19 अप्रैल 2020

प्रेम है खेल नहीं





अधूरा हो या पूरा हो
पर प्रेम प्रेम है
तो प्रेम हो तो सही
खेल खेल में खेल ही खेल है
खेल खेल में प्रेम नहीं
प्रेम सीधी सरल भासा एक
बनाओ ना इसे अबूझ पहेली
प्रेम है तो खेल नहीं
खेल है तो प्रेम नहीं
मन जाने तो जान ले
जाने ना संसार
जो जानो ऐसा तो
जान लो इसे प्रेम सही
ये प्रेम है कोई खेल नहीं
जो जाने जग सारा
पर जाने ना मन का आभास
तो जान लो इसे खेल गहरा
ये गहरा खेल है,
गहरा प्रेम नहीं
खेल खेल में गंवाए वही
जो डाले जाल फंद का डेरा
 प्रेम प्रेम के जोग में
 तर जाए वही
जो तप में रम कर
रह जाए बस खरा सोना
 प्रेम प्रेम है तो
प्रेम हो तो सही
खेल खेल में खेल ही खेल है
खेल खेल में प्रेम नहीं।


सौम्या वफ़ा।©

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