Baatbaatpekavita

शुक्रवार, 18 दिसंबर 2020

जीवन

›
 आंखों में तुमको भर मैं  तुम तक चलती जाती हूं  साथ साथ मेरे एक एक कण में तुम हीरे सा छलछलाते हो मैं एक बार आंखों में जीवन का पानी भरती हूं औ...
बुधवार, 16 दिसंबर 2020

इबादत

›
 ख़ामोश बैठ कहीं  कोई इबादत लिखूं  माथे पे बहती नदी की  एक लकीर खींच  कोई नई इबारत लिखूं  ज़मीं पे पसरी दहलीज़ों को  ज़मीं में मिला, उनपे  ज...
सोमवार, 7 दिसंबर 2020

सफ़र

›
 सफ़र में जो कहीं प्यासी हो लूं धूप घोल, पानी में पी लूं एक निवाले संग सारा जग जी लूं धरती संग बढूं पग पग हवा को कंधे डाले डोलूं ढलती शाम की...

क़लम की कमाई

›
 कुछ मेरी क़लम की कमाई कुछ मंच पे उतर के रंगों की मुंह दिखाई कुछ तालियां तारीफें कुछ जग हंसाई ले दे के इसके सिवा और क्या पास रखा मैंने जितनी...

मेरी कमाई

›
 मैंने अपने जीवन में कुछ नहीं बस जी को तोड़ कर ख़त्म कर देने वाली  मेहनत कमाई है उस मेहनत में पैसे नहीं  हर बार हार कमाई है उस हार से कमाया ...
मंगलवार, 24 नवंबर 2020

मैं और कविताएं

›
 हर दिन कहानियां जीते जीते मैं कविताएं चुन लेती हूं आग़ में बहते बहते चांदनी बुन लेती हूं ज़ख्म सी हो अगर कोई कहानी उस पर कविता का मलहम मल ल...
सोमवार, 23 नवंबर 2020

Pages of Peace ☀️🌗🌙☀️

›
 Fill Your blank pages  With Rainbow Dreams of Peace For Peace is the Only Love And Love is Peace The Two Companion Are always together For ...
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

छोटी छोटी सी बातों पर आती जाती कविता।

मेरी फ़ोटो
सौम्या वफ़ा॰
Mumbai , Maharashtra, Maharashtra, India
ज़िन्दगी कभी रेशम की रजाई तो कभी कांटों का पैराहन है और मैं बस दो हाथों से उसको उधेड़ती बुनती कभी दांतों से काटती कभी आंखों से संजोती उसकी बुनकर।
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.